Tesla की भारत में फ़ैक्टरी लगाने की योजना पर चर्चा के अलग-अलग चरणों में महाराष्ट्र, गुजरात और आंध्र प्रदेश के बीच विचार-विमर्श होता रहा।

Tesla ने इस हफ़्ते आधिकारिक तौर पर भारत में फ़ैक्टरी लगाने की अपनी योजना को छोड़ दिया। इसके साथ ही, एक ऐसे निवेश पर चर्चा, बहस और टालमटोल का सिलसिला भी खत्म हो गया, जो कई सरकारों, नीतिगत ढांचों और शुल्क संरचनाओं के बीच उलझा रहा, लेकिन कभी ज़मीनी स्तर पर शुरू नहीं हो पाया। इस फ़ैसले से भारत को मिलने वाला एक बेहद अहम और चर्चित विदेशी EV (इलेक्ट्रिक वाहन) निर्माण का अवसर हाथ से निकल गया है।
Tesla के भारत में आने की अटकलें कम से कम 2021 से चल रही थीं, जब कंपनी ने निर्माण में निवेश करने की शर्त के तौर पर सरकार से आयात शुल्क में कटौती की मांग की थी। उस समय आयातित EV पर शुल्क 100 प्रतिशत तक था, और सरकार ने उत्पादन के पक्के वादे के बिना झुकने से इनकार कर दिया था।
Tesla ने बातचीत से हाथ खींच लिया, और फिर दो साल का इंतज़ार करना पड़ा। इसके बाद कंपनी एक संशोधित नीति के तहत वापस आई, जिसमें उन निर्माताओं के लिए आयात शुल्क में कटौती की अनुमति थी, जो भविष्य में स्थानीय स्तर पर वाहनों को असेंबल करने का वादा करते थे। आखिरकार मुंबई और दिल्ली में शोरूम खुले, उसके बाद पुणे में एक सर्विस सेंटर बना, और ‘मॉडल Y’ इस ब्रांड का भारत में पहला उत्पाद बना।
‘लॉन्ग रेंज’ और ‘परफ़ॉर्मेंस’ वेरिएंट आधिकारिक वेबसाइट और रिटेल स्टोर के ज़रिए उपलब्ध कराए गए। फ़ैक्टरी लगाने की योजना पर चर्चा के अलग-अलग चरणों में महाराष्ट्र, गुजरात और आंध्र प्रदेश के बीच विचार-विमर्श होता रहा; बड़े निवेश की अफ़वाहें भी थीं, लेकिन यह योजना कभी ज़मीनी हकीकत नहीं बन पाई। ऐसा क्यों हुआ? पिछले 18 महीनों में टेस्ला की वैश्विक स्थिति कमज़ोर हुई है, क्योंकि अमेरिका और यूरोप दोनों ही जगहों पर उसकी बिक्री में गिरावट आई है।

मस्क की सार्वजनिक छवि से जुड़ी ब्रांड की धारणा संबंधी चुनौतियों ने कई बाज़ारों में कंपनी के व्यावसायिक प्रदर्शन को लेकर और भी ज़्यादा संदेह पैदा कर दिए हैं। घरेलू निर्माताओं के लिए, निकट भविष्य में इसका असर सीमित ही रहेगा। टाटा, महिंद्रा और विन्फ़ास्ट जैसे नए ब्रांड उन कीमतों पर प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं, जिनकी बराबरी कोई भी आयातित टेस्ला कार नहीं कर सकती।
इस फ़ैसले से एक ऐसी संभावना खत्म हो गई है, जिसमें भारत में ही बनी और ज़्यादा किफ़ायती Tesla कार उपलब्ध हो सकती थी। यह 30 लाख से 35 लाख रुपये की कीमत वाली एक ऐसी कार हो सकती थी, जो इलेक्ट्रिक SUV सेगमेंट में ज़बरदस्त प्रतिस्पर्धा पैदा कर सकती थी। आयातित टेस्ला कारें मौजूदा डीलर नेटवर्क के ज़रिए भारत में उपलब्ध रहेंगी, लेकिन भारत में इस ब्रांड की मौजूदगी कम बिक्री, ऊंची कीमतों और एक ऐसे ‘सुपरचार्जर नेटवर्क’ तक ही सीमित रहेगी, जिसका अभी विस्तार होना बाकी है।
